तुम्हारी नामौजूदगी में हमने साहित्य को चुन लिया,
अब तो इसी से हर बाते होती है,
शिकवे, गिले, और इश्क़ भी,
मगर जानती हो,
इस तक पहुँचने के लिए भी न
मुझे तुमसे होकर गुजरना ही पड़ता है,
और मेरा इश्क़ हर रोज़ जवां हो उठता है।
अब तो इसी से हर बाते होती है,
शिकवे, गिले, और इश्क़ भी,
मगर जानती हो,
इस तक पहुँचने के लिए भी न
मुझे तुमसे होकर गुजरना ही पड़ता है,
और मेरा इश्क़ हर रोज़ जवां हो उठता है।
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