बातों का सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा
जबतक सफर में रहूँगा
धीरे-धीरे आहिस्ता-आहिस्ता
तेरे करीब आकर तुझसे बहुत कुछ कहूँगा
जबतक.........
कबतक दूर जाओगे मुझसे ,
तेरी बातें तेरी ख़्वाब के साथ
आता जाता रहूँगा
जबतक ........
नदी की धार जैसी, झरनों की धार जैसी
तुम्हे छूता हुआ
आता जाता रहूँगा
जबतक सफर में रहूँगा
जबतक सफर में रहूँगा
धीरे-धीरे आहिस्ता-आहिस्ता
तेरे करीब आकर तुझसे बहुत कुछ कहूँगा
जबतक.........
कबतक दूर जाओगे मुझसे ,
तेरी बातें तेरी ख़्वाब के साथ
आता जाता रहूँगा
जबतक ........
नदी की धार जैसी, झरनों की धार जैसी
तुम्हे छूता हुआ
आता जाता रहूँगा
जबतक सफर में रहूँगा
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