माँ
आमों की बगीया में कभी खिलाया करती है आज खिलाने की मेरी बारी है,
घर का लाडला हूँ और सफ़र करता भी हूँ क्यों कि हिम्मत जारी है,
उन गलियों में लड़ते झगड़ते जब भी घर आया करता था,
तुम खड़ी रहती थी, आज खड़े रहने की मेरी बारी है,
पल पल अपने अश्रु से भिगोए तुमने आँचल है,
आज उस लोर को पोछने की मेरी बारी है,
ममता हर बार छलकाती थी जो उसपर प्यार बरसाने की अब मेरी बारी है,
माँ
आमों की बगीया में कभी खिलाया करती है आज खिलाने की मेरी बारी है ।
~~मिन्टू🙏🏻😭
आमों की बगीया में कभी खिलाया करती है आज खिलाने की मेरी बारी है,
घर का लाडला हूँ और सफ़र करता भी हूँ क्यों कि हिम्मत जारी है,
उन गलियों में लड़ते झगड़ते जब भी घर आया करता था,
तुम खड़ी रहती थी, आज खड़े रहने की मेरी बारी है,
पल पल अपने अश्रु से भिगोए तुमने आँचल है,
आज उस लोर को पोछने की मेरी बारी है,
ममता हर बार छलकाती थी जो उसपर प्यार बरसाने की अब मेरी बारी है,
माँ
आमों की बगीया में कभी खिलाया करती है आज खिलाने की मेरी बारी है ।
~~मिन्टू🙏🏻😭
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