ये तो नियति की देन है,
कभी चुलबुली सी है तो,
कभी मासूमियत से भरी,
कभी गुनगुनाते हुए अकेले तो ,
कभी बेजुबान जान के साथ,
ये तो नियति की देन है,
कभी अपने सपनो को बुनते हुए,
तो कभी उसे बाहों में समेटे हुए,
कभी इशारों में तो कभी कानों में फुसफुसाते हुए,
ये तो नियति की देन है......
कभी चुलबुली सी है तो,
कभी मासूमियत से भरी,
कभी गुनगुनाते हुए अकेले तो ,
कभी बेजुबान जान के साथ,
ये तो नियति की देन है,
कभी अपने सपनो को बुनते हुए,
तो कभी उसे बाहों में समेटे हुए,
कभी इशारों में तो कभी कानों में फुसफुसाते हुए,
ये तो नियति की देन है......
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