तुम्हारी बिंदी खूब भा रही
क्यों कि
मैं इश्क़ में हूँ
तुम्हारी काजल नज़र उतार रही
क्यों कि
मैं इश्क़ में हूँ
तुम शर्मा रही
तुम्हारी आँखे कुछ बता रही
क्यों कि
मैं इश्क़ में हूँ
तुम्हरी बातें हो रही
ये मुस्कान बता रही
क्यों कि
मैं इश्क़ में हूँ,
तुम्हारी होंठो की लाली गहरा रही
क्यों कि
मैं इश्क़ में हूँ
तुम सज रही
ये ख्यालात बता रही
क्यों कि
मैं इश्क़ में हूँ ।
क्यों कि
मैं इश्क़ में हूँ
तुम्हारी काजल नज़र उतार रही
क्यों कि
मैं इश्क़ में हूँ
तुम शर्मा रही
तुम्हारी आँखे कुछ बता रही
क्यों कि
मैं इश्क़ में हूँ
तुम्हरी बातें हो रही
ये मुस्कान बता रही
क्यों कि
मैं इश्क़ में हूँ,
तुम्हारी होंठो की लाली गहरा रही
क्यों कि
मैं इश्क़ में हूँ
तुम सज रही
ये ख्यालात बता रही
क्यों कि
मैं इश्क़ में हूँ ।
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