क्यूँ शोहरत के शाख से ही क्यों
नज़रों से भी तो गिरते है लोग
चरित्र से भी तो गिरते है
मगर इनका गिरना , गिरना नही होता क्या ?
चढ़ने के लिए गिरते ही है लोग
अब धीरे से हो या तेज़ी से
शायद इसमें थोड़ी बहुत ठहराव आ जाये तो
शायद बच सकते है
शोहरत शाख से भी और नज़रों से भी
नज़रों से भी तो गिरते है लोग
चरित्र से भी तो गिरते है
मगर इनका गिरना , गिरना नही होता क्या ?
चढ़ने के लिए गिरते ही है लोग
अब धीरे से हो या तेज़ी से
शायद इसमें थोड़ी बहुत ठहराव आ जाये तो
शायद बच सकते है
शोहरत शाख से भी और नज़रों से भी
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