बदलते रिश्तों के डोर ,
बदलते सोच का बागडोर,
कही ये भी तो मौसम की ही तरह है न,
देखो न बदलने के साथ साथ
पीछे छोड़ते जाते है अनमोल तोहफे ज़िन्दगी का
और तो और जोड़ते है नए रिश्ते वो भी चंद महीनों के लिये
तो ये भी तो मौसम की ही तरह हुए न,
मिज़ाज़ भी तो बिल्कुल वैसी ही है दिन के साथ चढ़ते उतरते
बदलते कई रंग
जेठ में अलग ,आसार में अलग
सावन में झिमझिम करते
तो ये भी तो मौसम के ही तरह है न .....
बस सब मिलाकर
बात एक ही है
ज़िन्दगी जो है न
वो बदलते मौसम की तरह ही है।
~~~~
बदलते सोच का बागडोर,
कही ये भी तो मौसम की ही तरह है न,
देखो न बदलने के साथ साथ
पीछे छोड़ते जाते है अनमोल तोहफे ज़िन्दगी का
और तो और जोड़ते है नए रिश्ते वो भी चंद महीनों के लिये
तो ये भी तो मौसम की ही तरह हुए न,
मिज़ाज़ भी तो बिल्कुल वैसी ही है दिन के साथ चढ़ते उतरते
बदलते कई रंग
जेठ में अलग ,आसार में अलग
सावन में झिमझिम करते
तो ये भी तो मौसम के ही तरह है न .....
बस सब मिलाकर
बात एक ही है
ज़िन्दगी जो है न
वो बदलते मौसम की तरह ही है।
~~~~
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें