ये जो तुम कहते हो न कि मेरी उम्र बढ़ रही है
मैं आगे बढ़ रहा हूं
मगर सच तो ये है कि
तुम मौत की ओर जा रहे हो
धीरे धीरे
कुछ दर्द लेकर तो कुछ मीठा दर्द लेकर
तुम तो आज भी सन्देह में जी रहे हो
सत्य से जिस दिन अवगत हो गए न तुम
उस दिन से ये मोह, माया त्याग कर
सिर्फ प्रेम करोगे प्रकृति से।
मैं आगे बढ़ रहा हूं
मगर सच तो ये है कि
तुम मौत की ओर जा रहे हो
धीरे धीरे
कुछ दर्द लेकर तो कुछ मीठा दर्द लेकर
तुम तो आज भी सन्देह में जी रहे हो
सत्य से जिस दिन अवगत हो गए न तुम
उस दिन से ये मोह, माया त्याग कर
सिर्फ प्रेम करोगे प्रकृति से।
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