प्रेम चलते चलते कविता के पास आई, कविता उदास सी बैठी
कहानी के पास गई
हुआ कुछ यूं उन्हें पसंद न आई कोई गाना तो वो बच्चों संग रंग में रंग गयी
तन से न थकी , पर मन से थक गई
उसे मिला एक ख्याब
जो हमेशा लिपटा रहता था
चंदन के साथ
और चंदन की गमक इतनी तेज
उसके पास और भी लोग आये
और हुई फिर एक
काव्य की रचना
जिसे हम काव्यांजलि के नाम से जानते है
कहानी के पास गई
हुआ कुछ यूं उन्हें पसंद न आई कोई गाना तो वो बच्चों संग रंग में रंग गयी
तन से न थकी , पर मन से थक गई
उसे मिला एक ख्याब
जो हमेशा लिपटा रहता था
चंदन के साथ
और चंदन की गमक इतनी तेज
उसके पास और भी लोग आये
और हुई फिर एक
काव्य की रचना
जिसे हम काव्यांजलि के नाम से जानते है
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें