जिंदगी की दौड़ में कुछ आगे आये तो
कुछ पीछे छोड़ आये रिश्ते
बस अब तो हमेशा कुछ पाने की ललक रहती है
शायद फिर से जीरो की ओर बढ़ने लगते धीरे धीरे...
और तरक्की करवाते है किसी और कि ज़िन्दगी की
या फिर यूँ कहे उन्हें भी जीरो से उठाकर फिर से जीरो पर पहुंचाने की एक नाकामयाब कोशिश करते है।
कुछ पीछे छोड़ आये रिश्ते
बस अब तो हमेशा कुछ पाने की ललक रहती है
शायद फिर से जीरो की ओर बढ़ने लगते धीरे धीरे...
और तरक्की करवाते है किसी और कि ज़िन्दगी की
या फिर यूँ कहे उन्हें भी जीरो से उठाकर फिर से जीरो पर पहुंचाने की एक नाकामयाब कोशिश करते है।
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