जब कोई लड़कीं किसी को देती है गुलाब
तो वो सिर्फ गुलाब नही देती है
वो देती है अपना सबसे अजीज चीज
वो देती है अपना मन,
वो देती है अपना सुख, दुख
अपना जीवन
वो कर देती है समर्पण खुद को
ताकि उसे वो सजा सके,
सँवार सके
रख सके उसे सहेज कर
वो करती है हर रात उसका इंतजार
ताकि वो कर सके कुछ गुफ्तगू
वो बता सके कि मैं क्या हूँ
वो कर देती है अपना सब कुछ निछावार अपना
एक ख़्वाब के लिए
वो हो जाती है उस समय के लिए
या यूं कहुँ वो हो जाती है पूरा का पूरा अपने महबूब का
वो निकाल कर रख देती है सबकुछ
उसके सामने ताकि वो लिख सके
एक नया इतिहास ज़िन्दगी का ।

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