सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

गुलाब नही उसका मन है

 जब कोई लड़कीं किसी को देती है गुलाब
तो वो सिर्फ गुलाब नही देती है
वो देती है  अपना सबसे अजीज चीज
वो देती है अपना मन,
वो देती है अपना सुख, दुख
अपना जीवन
वो कर देती है समर्पण खुद को
ताकि उसे वो सजा सके,
सँवार सके
रख सके उसे सहेज कर
वो करती है हर रात उसका इंतजार 
ताकि वो कर सके कुछ गुफ्तगू 
वो बता सके कि मैं क्या हूँ
वो कर देती है अपना सब कुछ निछावार अपना
एक ख़्वाब के लिए
वो हो जाती है उस समय के लिए 
या यूं कहुँ वो हो जाती है पूरा का पूरा अपने महबूब का
वो निकाल कर रख देती है सबकुछ
उसके सामने ताकि वो लिख सके
एक नया इतिहास ज़िन्दगी का ।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

शब्द चुनकर दर्ज किया

 शब्द जो बन चुके है अब किसी के निशान ले चलो मुझे वहां जहां के दीवारों पर  अंकित है मेरा नाम दिखाओ मुझे वो जगह  जहां पर गाढ़ रखा था तुमने पौधा जिसे तुम रोज सींचते थे सुना है मैने, वो विशाल पेड़ हो चुका हैं अब उस पेड़ पर  प्रेमी जोड़ी के नाम दर्ज होते है..! @ram_chourasia_

साल की आखिरी चाय

साल की आखिरी चाय हम उस वक्त मिले जब मुझे प्यार की ना तो जरूरत थी  नहीं प्यार से नफरत  लेकिन हमारी स्टोरी कुछ वैसी है  कैजुअल फ्रेंड्स थे  फिर क्लोज फ्रेंड्स हो गए  बेस्ट फ्रेंड्स हो गए   फिर लव स्टार्ट हो गया  यह किस्सा साल की आखरी शाम का है  हमारी दोस्ती को काफ़ी वक्त बीत चुका था  साल की आखिरी शाम जो सर्द थी  पर गुलाबी भी  हम कोचिंग के बाहर खड़े थे,  क्लास शुरू होने में पंद्रह मिनट बचे थे  मेरे हाथ हमेशा की तरह ठंडे और बिल्कुल सुन्न थे । "चाय पियेगी... चलते चलते बस यूं ही पूछा उसने हां...  मैंने फट से जवाब दिया  जैसे कि मैं बस उसके पूछने के इंतजार में थी  हम एक दूसरे के सामने बैठे हैं अदरक के साथ चाय की महक हवा में घुलने लगी  "अरे जल्दी कर दो भैया" ... उसने मेरे हाथ अपनी गर्म हथेलियों में थामते हुए कहा । मुझे कोई जल्दी नहीं थी । बैकग्राउंड में बज रही गाने ने  "सोनिए हीरिए तेरी याद औंदिए, सीने विच तड़पता है दिल जान जांदिए" उस शाम को और भी रूमानी बना दिया था । चाय आई... "जल्दी से पीले क्लास स्टार्ट ...

जिंदगी

 सर पर बोझ डुबोकर ख़्वाब फटे एड़ियां,घिसकर चप्पल  लालन-पालन है ज़िन्दगी  बुन कर, सहेज कर तारीफ एक गलती पर  बदनाम होना है ज़िन्दगी थाम कर उंगली बांध कर कलाई विदा कर बिटिया  आँसू बहाना है ज़िन्दगी  इकट्ठा कर मेहनत को पोटली में बांध घर से धक्के खाना है ज़िन्दगी  भटकते राहों में ठोकर खाकर  बिना बेटे/बेटियों के हाथों अग्नि से प्यार होना है ज़िन्दगी । @tumharashahar