दिखाई दिए भी तो ऐसे जैसे चांद हो गए, चले भी गए तो ऐसे जैसे मरीचिका हो गए।
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बनाना है तुम्हे
मैं तुम्हे चूमना चाहता हूँ
सर् से पांव तक
मैं तुम्हे लिखना चाहता हूं
कविता से कहानी तक
मैं तुम्हे बनाना चाहता हूं
शहर से गाँव तक
मैं तुम्हे रंगना चाहता हु
प्रेम से इंद्रधनुष तक
मैं तुम्हे सींचना चाहता हूं
दुख से सुख तक
मैं तुम्हारा होना चाहता हूं
आज से लेकर अनंत तक ।
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