लड़कियां लिखती है प्रेम
मन की
लड़के लिखते है प्रेम तन की
नही लिखते वो जज़्बात मन की
लडकिया लिखती है कथा अंतर्मन की
नही लिख पाते लड़के
चलते रहते है दोनों के मन मे
शीत युद्ध
पिसता जाता है
कोरा कागज और कलम
इन दोनों के बीच
बच जाता है तो सिर्फ
अंर्तमन का एहसास
ज़िसे पढ़कर लोग समझते है
कितना गहरा है ये प्रेम
अगर सच मे कहूँ
तो
उन्हें ये नही पता लगता कि
कितने गहरे डूबकर लिखी होती है
कल्पना होती है
सच होती है
ये
कोरे कागज पर स्याही के निशान ।

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