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एक पहाड़न

वो जानती है कि मुझे कैसे मनाना है
वो हर बार जीत जाती है मेरी हार से
खुद को बदनाम न कर मेरा नाम कर जाती है
ये वही सुनहरे बालो वाली लड़की है,
जो उस रात मिली थी मुझे पीपल पेड़ के पास,
कुछ आस लिए, कुछ ख्याब लिए
टूटना जानती है वो म
गर जुड़ने के लिए उसे किसी का साथ चाहिए,
वो रहना चाहती है सबके साथ मगर उसे उसकी तन्हाई ने रहने नही दिया,
मान रखना जानती है वो सबका मगर उसे किसी ने समझा ही नही आजतक,
वो वही लड़कीं है पहाडोवाली जो जुगनुओं सी रात भर जगी रहती है मगर आंखों में टिमटिमाते तारो की झलक की जगह
मोतियों जैसी बूंद रहती है पानी की,
ये वही कोमल कली है, खुशबूओं से भरी, गुलमोहर सी चमक वाली, महफ़िल लूट ले जाने वाली,
खुले मन की,  स्वतंत्र विचार की, पहाडोवाली लड़कीं
न जाने कौन सी मिट्टी की बनी है ये
शायद कुछ अंश है चट्टानों वाली, नमी है ,
हरियाली है, ठंडक है इसकी आंखों में,
मगर जैसी भी है , है तो हिम्मत वाली
क्यों कि ये वही लड़कीं है
पहाड़ोवाली
पहाड़ोवाली.....

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