सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सादगी वाली लड़की

उसकी आवाज़ मधुर है, वो अदाओं से भरपूर है
रहती तो गंगा तट पर है मगर हल्का सा भी न गुरूर है न गुमान है
वो सुंदर है, सुशील है
सब से अनोखी, अलबेली है,
खुद में मस्तमॉली, छरहरी ,नाजूक, छुईमुई सी है
उसके जुल्फों जब भी चूमि है उसको गालों को,
झलकती है मुस्कान और सादगी,
जो भरपूर है ,भोली है
मगर सबकी चहेती बोली है
वो गंगा तट की छोरी है
वो अनोखी अलबेली है
उसकी बातों से झलकती मासूमियत,
प्यार है
वो अपने आँगन की खुशबूदार पेड़ है
देती है छांव
करती है रखवाली मृदा की
वो अनोखी अलबेली
वो गंगा तट की छोरी है ।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जिंदगी

 सर पर बोझ डुबोकर ख़्वाब फटे एड़ियां,घिसकर चप्पल  लालन-पालन है ज़िन्दगी  बुन कर, सहेज कर तारीफ एक गलती पर  बदनाम होना है ज़िन्दगी थाम कर उंगली बांध कर कलाई विदा कर बिटिया  आँसू बहाना है ज़िन्दगी  इकट्ठा कर मेहनत को पोटली में बांध घर से धक्के खाना है ज़िन्दगी  भटकते राहों में ठोकर खाकर  बिना बेटे/बेटियों के हाथों अग्नि से प्यार होना है ज़िन्दगी । @tumharashahar

देवालय

 Pic-self click किसान की मेहनत, पसीने से सींचे  मिट्टी से बने, कलाकृतियों से सजे देवालय सा घर  जिसमें वास करती है देवी-देवता जिसे चढ़ता है पूंडरी जलते है दीपक  रात के समय चाँद की उपस्थिति में आँगन होती रौशन... बटोरने खुशियां  कभी लौट आना शहरों से तुम उस गाँव की तरफ जहां वास करती है आज भी संस्कृति, पवित्रता, अध्यात्म निश्च्छल प्रेम घर आँगन में । @tumharashahar0

प्रिये

वो मेरी सुर थी वो मेरी लय थी वो मेरी गीत थी मेरी संगीत थी, वो मेरी नृत्य थी मेरी नृत्यांगना थी, वो छेड़ जाया करती थी अक्सर मुझे मैं बन जाया करता था उसका वाद्ययंत्र, रम जाया करता था उसके संग-संग बनते-बिगड़ते एक नए सुर में पहचान बनती एक नए रंग रूप में ऐसी थी मेरी प्रिये