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जिनके अल्फ़ाज़ इतने सुंदर हो सोचो ज़रा
 वो दिल की कितनी सुंदर होगी ,
।मानो कल्पनाओं से ही जी भर उठता हो,
और एक नए राह में जाने के लिए उत्सुक हो जाता हो मन,
उसकी तलाश में, उसे पढ़ने के लिए, उसको अपना बनाने के लिए,
सब कुछ खोकर सिर्फ उसके ख्याल में डूब जाना ही
तो इश्क़ की पहली सीढ़ी है
और फिर उसका इस तरह से अल्फाज़ो का तराना छेड़ना
मानो दिल मे कोई संगीत बज जाने के जैसा ही तो है,
और इश्क और तान जहाँ न छेड़े जाए भला वाला इश्क़ कैसे हो सकता है, मेरे लिए वो तो संपूर्ण संगीत की देवी लगती है
सुर वही, अंदाज़ वही, अल्फ़ाज़ तो ऐसे जैसे मानो की कोई मोहिनी हो,
और फिर उसका न होना ये अपने आप मे थोड़ा पाप करने जैसा ही तो है ।

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