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किसान की मेहनत, पसीने से सींचे
मिट्टी से बने, कलाकृतियों से सजे
देवालय सा घर
जिसमें वास करती है देवी-देवता
जिसे चढ़ता है पूंडरी
जलते है दीपक
रात के समय चाँद की उपस्थिति में
आँगन होती रौशन...
बटोरने खुशियां
कभी लौट आना शहरों से तुम
उस गाँव की तरफ
जहां वास करती है आज भी
संस्कृति, पवित्रता, अध्यात्म
निश्च्छल प्रेम
घर आँगन में ।
@tumharashahar0

Very nice
जवाब देंहटाएंThnku
हटाएंBeautiful lines 😍
जवाब देंहटाएंThanku
हटाएंBeautiful lines 😍
जवाब देंहटाएंBeautiful lines 😍
जवाब देंहटाएंBahut achha likha h.👌👍
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