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गाँव हो जाना

मेरे लिए तुम जितनी प्यारी और मासूम हो
उतना ही मेरा लिए मेरा गाँव भी है

तुम्हे देखना एक गाँव को देखने जैसा ही तो है
या यूं कहूँ तुम्हारे अंदर पूरा गांव समाया हुआ है

मुझे कभी कमी महसूस नही हुई गाँव की
जब मैं तुम्हारे इर्द-गिर्द रहा हूँ 

बस ये हुआ है कि मैं गले नही लगा पाया हूँ अबतक
मगर उम्मीद है कि मैं तुम्हारे संग-संग रहकर
एक दिन पूरा गांव हो जाऊंगा

और 

फिर हम दोनों के पीछे-पीछे ये शहर दौड़ा आएगा। 

ये शहर , 
जो पहले कभी गाँव हुआ करता था
और हम भागते रहते थे इसके पीछे-पीछे

मगर वो तो तुम जानती ही हो
जो चीज़ जहाँ से शुरू होती है वही आकर खत्म भी होती है।

जैसे शून्य का सफर शून्य तक

जन्म का सफर जन्म तक

ठीक उसी तरह

"गाँव का सफर गाँव तक "

और इस तरह से
तुमसे मिलकर मेरा गाँव हो जाना 
एक बार फिर से दर्शा गया ये कथन... 

देखो तुम गाँव ही रहना
ताकि मैं तुम्हें तलाशते शहर से गाँव हो जाऊं। 

ठीक है न.... 


©मिंटू/@tumharashahar

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