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तन्हा हूँ

जब तुम्हारे दिल मे कुछ नही
तो मेरी इतनी फिक्र क्यूँ ?
मैं तो आज भी अकेला हुँ
अगर तुम चाहो तो मेरा हाथ थाम सकती हो
मुझे अपना बना सकती हो
बस विश्वास रखना होगा तुम्हे
की मैं आज भी अकेला हूँ...
मैं ये नही कर रहा कि मैं बहुत अच्छा हूं
हो सकता है मेरे बातों से
मेरे स्वभाव से तुम्हे प्यार हो जाये
मगर ये मत कहना कि इश्क ऐसे नही होता,
ये मत कहना कि मिले हुए चार दिन तो हुए है और प्यार  कैसे हो गया
ये तो  दो पल की एहसास है जो समझ लो तो प्यार ही प्यार है नही तो कुछ नही....
हाँ मगर इतना ज़रूर कहूंगा कि
मैं तुम्हे पसन्द करने लगा हूँ...
और मैं आज भी अकेला हु
अगर तुम साथ चल सको और मुझपर विश्वास रखो तो
मैं सारी उम्र तुम्हे सजा कर रखूंगा,
मैं तुम्हे अपना अंग बनाकर रखूंगा,
मैं तुम्हे चाहता रहूँगा
क्यों कि चोट खाया इंसान वो हर पल के दर्द, प्यार को समझ सकता है
अगर जो कभी न समझ पाया तुम्हे  तो बस तुम मुझे भर लेना अपनी बाहों में
बना लेना मुझे अपने अज़ीज़, अपना अंग, अपना प्रेम......
क्यों कि मैं आज भी अकेला हूं
तन्हा हूँ ।

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