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मेरा प्रेम

वो लिखती है बहुत कमाल ,
निकाल रख देती है दिल पन्नो पर,
मजबूर कर देती है पढ़ने को,
वो बहुत लाजवाब है
वो नायाब तोहफा है मेरे लिए,
मेरी नही है तो क्या हुआ
जिसकी भी है वो किसी कोहिनूर से कम नही
क्यूँ की वो लिखती है बहुत कमाल,
निकाल रख देती है दिल पन्नो पर
मैं हर बार कायल हो जाता हुँ उसकी कलम का,
मैं कायल हो जाता हूँ उसके अल्फ़ाजो से पिरोए माला का,
मैं डूब जाता हूं उसकी लेखनी में,
क्यूँ की वो है बहुत कमाल,
मेरी नही है तो क्या हुआ जिसकी भी है वो है बहुत लाजवाब,
वो है कोहिनूर
वो है मेरा प्यार
वो है नायाब तोहफा मेरी ज़िंदगी का,
मैं संभाल कर रखना चाहता हूं उसे
किसी म्यूजियम में रहते है जैसे अज़ीज़, नायाब तोहफे
कोई इतिहास जैसा सजा रखा होता,
क्यों कि वो भी तो मेरे लिए नायाब है,
उसका प्यार मेरे लिए तोहफा ।


~~~मिन्टू

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