न जाने क्यूँ न चाहते हुए भी
खिंचा चला आ रहा तेरी ओर,
अपनी मंज़िल से भटकता हुआ,
ठोकर खाता हुआ,
कुछ अल्फ़ाज़ निकालते हुए,
तो कुछ रचना करते कविताओं की
जो अक्सर तेरे होने का सवाल छोड़ जाता है ।
~~मिन्टू
खिंचा चला आ रहा तेरी ओर,
अपनी मंज़िल से भटकता हुआ,
ठोकर खाता हुआ,
कुछ अल्फ़ाज़ निकालते हुए,
तो कुछ रचना करते कविताओं की
जो अक्सर तेरे होने का सवाल छोड़ जाता है ।
~~मिन्टू
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें