-तुम छोड़ गई माँ
उस आँगन में,
जिसे
सजाया था,
जिसे सींचा था अपने कर्मो से,
अपने बलिदान से,
अपने अश्को से,
और कह गयी थी
मैं न रहूं तो जीना
सीख लेना
वर्तमान के हालतों में
कुछ सीख लेना हुनर
वर्तमान के हालातों में
उस आँगन में,
जिसे
सजाया था,
जिसे सींचा था अपने कर्मो से,
अपने बलिदान से,
अपने अश्को से,
और कह गयी थी
मैं न रहूं तो जीना
सीख लेना
वर्तमान के हालतों में
कुछ सीख लेना हुनर
वर्तमान के हालातों में
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