प्यार के नाम एक खत
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वैसे ये प्रेम , इश्क़, प्यार इन शब्दों से आप तो परिचित है ही
सबका एक ही मतलब होता है समर्पण,त्याग,भक्ति,
आत्मा का मिलन।
"हम जब भी बात करते है प्रेम की तो समर्पण, त्याग तक ही सीमित नही रहते अपितु भक्ति से ऊपर उठ परमात्मा और आत्मा का मिलन तक जाकर ठहर जाते है जो आज के समय मे मुश्किल है ।"
खैर मेरा प्यार अभी तो आत्मा या परमात्मा तक नही पहुंचा है और न कभी पहुंचेगा , अब इसका क्या कारण है ये जब आप स्वयं के अंदर झाँक कर देखेंगे तो महसूस हो जाएगा क्यों कि हम सब एक ही मिट्टी से बने है , एक ही तन, एक ही मन है और एक ही राह से गुज़रते है
परंतु किन्ही की थोड़ी मिलती, किन्ही की ज्यादा मिलती या किन्ही की देर से मिलती है ।
वैसे मैं उस से मिला तो नही हूँ या यूं कहूँ मैं मिल भी लिया हूँ लेकिन जो भी हो एहसास जबतक जीवित है
मेरा प्रेम सदैव जीवित ही रहेगा। इस प्रेम में मैंने लेखन को लिखना सिख रहा हूँ ।।
मुझे यकीन है मेरा प्रेम तुमतक पहुँचे
मैं चाहता हूं भले हम मिले या न मिले एक हो या न हो
परंतु तुम मुझे पढ़ते रहना, मुझे समझते रहना उसमे खोते जाना तुम । जैसे मैं लिखते वक्त खो जाता हूं तुम्हारी तस्वीर मे,
मेरा रोम-रोम, मेरा कण-कण सिर्फ तुम्हरा ही नाम लेता है और मैं एक नए ऊर्जा का आवाहन करने लगता हूँ
एक नए रूप में जीने लगता हूँ यकीन मानो तुम भी इसे पढ़कर उसी तरह ऊर्जावान हो जाओगी।
बात जहाँतक विश्वास की है ये तबतक नही टूटेगा जबतक तुम यकीन रखती हो मुझपर, मुझ पर प्यार लुटाती हो, मुझे समझती हो शक के ऊपर उठकर
एक बालमन से उठकर, किसी संगिनी की तरह तुम सोच रखती हो तब तक ।
माना कि बहुत अड़चने आएंगी मगर तुम मुझसे यूँ ही प्यार करते रहना मन-ही-मन
या फिर मैं तो ये कहता हूं कि मैं अपना समर्पण कर देता हूँ तुम्हे सबकुछ जो मेरे पास है। वैसे मेरे पास कुछ भी नही है
न धन, न दौलत, न घर-न मकान और न ही कोई नौकरी पेशा.... "लेकिन मेरे पास प्यार बेसुमार है जो तुम रख सको तो ठहरना, मुझे स्वीकार कर लेना।
मेरा प्रेम सहेजकर तुम अपने आँचल में रख लेना
ताकि जब भी तुम्हे कोई तकलीफ हो तो तुम उस आँचल को अपने सर पर रख फिर से ऊर्जावान हो जाओ ।
मुझे यकीन है मेरा प्रेम तुम्हे कभी थकने या हारने नही देगा। "
मेरा प्रेम सदैव तुम्हारै लिए जीवित रहेगा, तुम्हे समर्पित रहेगा ।
मैं चाहता हूं मेरा प्रेम तुम्हे तृप्ति की ओर अग्रेसित करे ताकि मैं उम्र भर तुम्हे लिखता रहूं, सजाता रहूं, तुम्हारा श्रृंगार करता रहूँ
ऐसा श्रृंगार जो तुमतक ही सीमित रहे ।
©मिन्टू/@tumharashahar
Pic- logomaker

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