मैं कहता था न कि लड़कियां जितनी शिद्दत से गाना का
चुनाव करती है प्रेम में रहकर
मैं नही कर पाता हूँ
तभी तो मुझे ये लड़कियां पसंद है
जो पहचान करा जाती है उस मधुर धुन की
और सीखा जाती है जीना उन पलों को
जो भरी रहती है प्रेम से,
ऐसा प्रेम जहां से वापस लौट आना नामुमकिन है
मुमकिन है तो सिर्फ खुद को अकेला पाना,
एकांत की तलाश में भटकते रहना अपने ही देश के शहर में, जंगल में, मन्दिर में,
आस-पास खोजता तालाब जहां फेक सके पत्थर
जहाँ बढ़ा सकें सोच को
जहाँ धुन हो बांसुरी के,
जहाँ चिड़िया गाती हो गाना....
और मचलते मन को मिले कुछ पल के लिए
सुकून, शांति, स्थिरता ।
©मिन्टू/@tumharashahar

khubsurat....🌸
जवाब देंहटाएंShukriya
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