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अंधकार की ओर

यूँ ही कुछ अधूरा सा
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 गुरूर, गुमान, अहंकार, द्वेष, जलन,अज्ञानता  जैसी
  ज्ञान जो अर्जित कर ले
वो विनाश की ओर ही गया है
शायद ये संकेत ज़िन्दगी हर किसी को देती है
 किसी न किसी रूप में 
अब बात है कि कितने लोग समझ पाते है....
जहाँ तक मेरी बात है मैं विनाश की ओर अग्रसर हूँ
मेरे अंदर वो सारे गुण मौजूद है जो इशारा करती है कि
आप कुछ भी नही है...और ये सच भी है "मैं कुछ भी नही "...
मुझे जो आभास होता है, जो प्रतिबिंब दिखता है
वो आज नही तो कल सत्य ज़रूर होता है
और मेरा मानना है कि
मैं अंधकार की ओर जा रहा हूँ
जहां से वापस आना बहुत कठिन है

शायद जिस दिन इंसान सच्चाई से रूबरू होगा उसे उस दिन असली आज़ादी मिलेगी,
उसे खुशी मिलेगी
अन्यथा
जलन, झूठ, वाहवाही में ही वो रहकर अंधकार को स्वीकार कर
खुद को कोसता हुआ एक दिन तड़प के साथ अकेले रहते रहते मिल जाएगा मिट्टी में ।
शायद मैं उसी राह पर हूँ ।



©मिंटू/@tumharashahar

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