तुम मेरी साधारण सी कविता नही पढ़ते हो,
अगर यही किसी पुस्तक में होती
तो तुम भी वाह-वाह करते इसे तस्वीर बना कही सजाते ।
अगर यही किसी पुस्तक में होती
तो तुम भी वाह-वाह करते इसे तस्वीर बना कही सजाते ।
©मिंटू/@tumharashahar
दिखाई दिए भी तो ऐसे जैसे चांद हो गए, चले भी गए तो ऐसे जैसे मरीचिका हो गए।
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