बस यूं ही कुछ अधूरा सा
.................................
कौन सी गहराई की तलाश में है ?
कही नही जी,
जहाँ कुछ नही वहाँ कुछ होना चाहिए
ताकि लोगो को लगे कि व्यस्त है,
कुछ कर रहा है
वरना ताना-वाना में ज़िन्दगी तो गुजर- बसर हो ही रही है, अधपक्के ख्वाबो के बीच ,
मगर पता नही कब पकेगा ये ख़्वाब ।
बस यूं समझीये धीमी आंच पर पक रहे है ,
अब देख लीजिए इसी कहावत को
"बूँद-बूँद से घड़ा भरता है"
अब अपना ज़िन्दगी का घड़ा कब भरेगा ये तो भगवान जाने
बाकी सफर चलता रहेगा,
कुछ पुराने लोगो और नए रिश्तों के साथ ,
कुछ उतार-चढ़ाव तो
कुछ सीख को लेकर
,
बाकी हुनर तो है अपने पास
अब इसे कोयले से हीरा बनाना है
थोड़ा समय लगेगा
मगर बन जाएगा
।
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कौन सी गहराई की तलाश में है ?
कही नही जी,
जहाँ कुछ नही वहाँ कुछ होना चाहिए
ताकि लोगो को लगे कि व्यस्त है,
कुछ कर रहा है
वरना ताना-वाना में ज़िन्दगी तो गुजर- बसर हो ही रही है, अधपक्के ख्वाबो के बीच ,
मगर पता नही कब पकेगा ये ख़्वाब ।
बस यूं समझीये धीमी आंच पर पक रहे है ,
अब देख लीजिए इसी कहावत को
"बूँद-बूँद से घड़ा भरता है"
अब अपना ज़िन्दगी का घड़ा कब भरेगा ये तो भगवान जाने
बाकी सफर चलता रहेगा,
कुछ पुराने लोगो और नए रिश्तों के साथ ,
कुछ उतार-चढ़ाव तो
कुछ सीख को लेकर
,
बाकी हुनर तो है अपने पास
अब इसे कोयले से हीरा बनाना है
थोड़ा समय लगेगा
मगर बन जाएगा
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