वो जानती है कि मैं पढ़ लेता हूँ उसका मन
मगर फिर भी वो मेरी बात रखने के लिए
अपनी बात को रख देती है उसी मेज़ पर
जहाँ वो रखा करती है किताब
और करती रहती है मेरा इंतजार
उस ठंड वाली रात में
मैं उसको उसकी बात समझकर सो जाता हूँ
उसी रात
जिस रात वो करना चाहती है
बेइंतेहा इश्क़,
कहना चाहती है बहुत कुछ
मेरे बाहों में आकर,
वो बताना चाहती है कि
मुझे तुमसे बहुत प्यार है
मगर कह नही पाती
बस हमेशा की तरह "इंतजार" से
जता देती है वो अपना
निश्छल प्रेम
अपना निस्वार्थ प्रेम ।
मगर फिर भी वो मेरी बात रखने के लिए
अपनी बात को रख देती है उसी मेज़ पर
जहाँ वो रखा करती है किताब
और करती रहती है मेरा इंतजार
उस ठंड वाली रात में
मैं उसको उसकी बात समझकर सो जाता हूँ
उसी रात
जिस रात वो करना चाहती है
बेइंतेहा इश्क़,
कहना चाहती है बहुत कुछ
मेरे बाहों में आकर,
वो बताना चाहती है कि
मुझे तुमसे बहुत प्यार है
मगर कह नही पाती
बस हमेशा की तरह "इंतजार" से
जता देती है वो अपना
निश्छल प्रेम
अपना निस्वार्थ प्रेम ।

Waah
जवाब देंहटाएंThanku
हटाएंSuper Bhai ji
जवाब देंहटाएंThanku जी
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