गर वो खत पढ़ लिया होता
लिख दिया होता तुम्हे जवाब
देर हो चुकी अब तो बहुत
तुम अब, लिखी जाती हो
दूसरो के खतों में
दूसरों के स्याही से,
किसी दूसरे के जज़्बात के साथ
और मैं तलाश रहा हूँ
तुम्हारी ही जैसी कोई
ताकि ज़िंदा रहूँ और
लिखता रहूँ ताउम्र
कोई कविता,
कोई गज़ल या कोई कहानी
या फिर लिखूं अंदर दबे जज़्बातों को
और बन जाऊं पुरातत्व विभाग।
~~~मिन्टू
लिख दिया होता तुम्हे जवाब
देर हो चुकी अब तो बहुत
तुम अब, लिखी जाती हो
दूसरो के खतों में
दूसरों के स्याही से,
किसी दूसरे के जज़्बात के साथ
और मैं तलाश रहा हूँ
तुम्हारी ही जैसी कोई
ताकि ज़िंदा रहूँ और
लिखता रहूँ ताउम्र
कोई कविता,
कोई गज़ल या कोई कहानी
या फिर लिखूं अंदर दबे जज़्बातों को
और बन जाऊं पुरातत्व विभाग।
~~~मिन्टू

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