उड़ान देखने आया हुँ
आसमान तक कि जमीन से,
क्या ज़िन्दगी की उड़ान भी ऐसी ही है जैसे इस वायुयान की
या फिर पक्षियों सी ,
क्या तुम बता सकते हो तकदीर के लेखक ?
क्या तुम उड़ना सीखा सकते हो सफर के राहगीर ?
या मैं भी वैसे ही वापस लौट जाऊँगा दाने चुंग-चुंग कर
या कोई इतिहास रच जाऊंगा लड़-लड़ कर,
क्या तुम साथ दोगे मेरे जन्मदाता उड़ान भरने में मेरी
या तुम भी वही छोड़ जाओगे जहाँ से मुझे उड़ान भरनी है ?
~~~मिन्टू
आसमान तक कि जमीन से,
क्या ज़िन्दगी की उड़ान भी ऐसी ही है जैसे इस वायुयान की
या फिर पक्षियों सी ,
क्या तुम बता सकते हो तकदीर के लेखक ?
क्या तुम उड़ना सीखा सकते हो सफर के राहगीर ?
या मैं भी वैसे ही वापस लौट जाऊँगा दाने चुंग-चुंग कर
या कोई इतिहास रच जाऊंगा लड़-लड़ कर,
क्या तुम साथ दोगे मेरे जन्मदाता उड़ान भरने में मेरी
या तुम भी वही छोड़ जाओगे जहाँ से मुझे उड़ान भरनी है ?
~~~मिन्टू

Wah ati uttam
जवाब देंहटाएंSatya
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