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पिता

 पिता वो लहजा है

जिससे ढलता, गढ़ता  परिवार है

लिखने की शक्ति, जीने का सबक

बतियाने का ढंग और विचार हैं

सारी ऋणात्कमता एक तरफ

पिता की सहानुभूति एक तरफ

जिंदगी को पढ़ने, सीखने और लड़ने का सबक एक तरफ,

तो एक तरफ विश्वास 

स्थापित करने का जरिया,

न जाने कितने ही सीढियां चढ़े

लड़खड़ाते हुए

फिर ,

उनका हौसला एक तरफ,

एक तरफ तंज समाज का

तो एक तरफ प्यार पिता का,

एक तरफ जवानी तो

एक तरफ बुढ़ापे की लाठी,

सारे मसले एक तरफ

तो पिता का ज्ञान एक तरफ

एक तरफ  अकेले खड़ा रहने की शक्ति

तो एक तरफ सूखे आंखों में पानी ।


Insta -(ram_chourasia)

पिता by hare ram chourasia


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