दिखाई दिए भी तो ऐसे जैसे चांद हो गए, चले भी गए तो ऐसे जैसे मरीचिका हो गए।
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फिर तेरी याद
फिर तेरी याद आ गयी
रात गुजरते-गुजरते,
दिन ढल रही है
जज़्बात संग चलते-चलते,
मर्म इतना सा है
तू रहती पास हफ्ते-हफ्ते,
मैं करता रहता
प्यार आहिस्ते-आहिस्ते,
फिर तेरी याद आ गयी
रात गुजरते-गुजरते ।।
👌👌
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