सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अच्छी चीजें कौन तय करेगा ?

 अच्छी चीजें जानकारी के अभाव में

पीछे रह जाती है

और उसे परखने की कला भी आपको घोर अपराध की ओर ले जाती है 

इसलिए जो अच्छी चीजें मिलती है उसे ग्रहण कर लेना चाहिए

उसे संजोए रखना चाहिए

अगर उनसे प्रेम है, लगाव है तो

खुद से जुदा नही होने देना चाहिए ...


लेकिन ये कौन तय करेगा कि वो अच्छी है या बुरी ?

समय या आप या फिर मैं खुद

एक समय बीत जाने के बाद ?

@tumharashahar0

Pic-@pinterest

अच्छी चीजें कौन तय करेगा ?


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जिंदगी

 सर पर बोझ डुबोकर ख़्वाब फटे एड़ियां,घिसकर चप्पल  लालन-पालन है ज़िन्दगी  बुन कर, सहेज कर तारीफ एक गलती पर  बदनाम होना है ज़िन्दगी थाम कर उंगली बांध कर कलाई विदा कर बिटिया  आँसू बहाना है ज़िन्दगी  इकट्ठा कर मेहनत को पोटली में बांध घर से धक्के खाना है ज़िन्दगी  भटकते राहों में ठोकर खाकर  बिना बेटे/बेटियों के हाथों अग्नि से प्यार होना है ज़िन्दगी । @tumharashahar

देवालय

 Pic-self click किसान की मेहनत, पसीने से सींचे  मिट्टी से बने, कलाकृतियों से सजे देवालय सा घर  जिसमें वास करती है देवी-देवता जिसे चढ़ता है पूंडरी जलते है दीपक  रात के समय चाँद की उपस्थिति में आँगन होती रौशन... बटोरने खुशियां  कभी लौट आना शहरों से तुम उस गाँव की तरफ जहां वास करती है आज भी संस्कृति, पवित्रता, अध्यात्म निश्च्छल प्रेम घर आँगन में । @tumharashahar0

प्रिये

वो मेरी सुर थी वो मेरी लय थी वो मेरी गीत थी मेरी संगीत थी, वो मेरी नृत्य थी मेरी नृत्यांगना थी, वो छेड़ जाया करती थी अक्सर मुझे मैं बन जाया करता था उसका वाद्ययंत्र, रम जाया करता था उसके संग-संग बनते-बिगड़ते एक नए सुर में पहचान बनती एक नए रंग रूप में ऐसी थी मेरी प्रिये