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मेरी राह

तुम चलती रही उस राह
और
मैं
कब तेरी राह का राहगीर हो गया पता ही नही चला,

तेरी बिखरती मुस्कान को समेटते रहा
मगर
कब रात हो गयी पता ही नही चला,

चांदनी रात में तुम और खूबसूरत  लगने लगी
तुम्हें देखते रहे रात के परहेदार
और
मैं कब तेरा
काजल होता गया
पता ही नही चला,

तुम चलती रही उस राह
और
मैं
कब तेरी राह का राहगीर हो गया पता ही नही चला ।




~~~मिन्टू

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