दिखाई दिए भी तो ऐसे जैसे चांद हो गए, चले भी गए तो ऐसे जैसे मरीचिका हो गए।
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शिकायतें
आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे एक दूसरे पर,
गर दिल मे क्या है
एक दूसरे के,
ये जानने की कोशिश नही की कभी
बिछड़ते गए
समय के साथ-साथ,
टूटते-बिखरते ,
हालात बिगड़ते,
अपना अजीज खोया,
बिलखते रहे,
इंतज़ार करते रहे,
और आज
तुम फिर याद आ गए,
और
छलक आए आँसू
इन आँखों से
जिसमे तुम कभी ख़्वाब देखा करती थी ।
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